beti bachao beti padhao essay in hindi

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 2021 | beti bachao beti padhao essay in hindi

Beti bachao beti padhao essay in hindi बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध : नमस्कार विद्यार्थी मित्रों ! आज के इस लेख में हमने आपके लिए beti bachao beti padhao essay in hindi बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध हिंदी में लिखा है।

प्रस्तावना : हमारे देश में बेटी को हमेशा से ही दूजा स्थान मिला है। पर यह आज कि बात नहीं है, प्राचीन काल से यह प्रथा चली आ रही हैं। प्राचीन काल में पुरुषप्रधान राज्य व्यवस्थाओं के कारण हमेशा पुरुषों को ही अपनी जिंदगी को अपनी मर्जी से जीने के अधिकार प्राप्त थे पर महिलाएं हमेशा से वंचित ही रही हैं।

आज भी महिलाओं या लड़कियों को दूजा माना जाता है, उनकी जन्म पर खुशी की बजह लोग दुःखीत होते हैं। उन्हे इस विश्व में आने से पहले ही मारा जाता हैं। इस स्थिति की बदलने के लिए और महिलाओं की बचाकर उन्हे शिक्षित करने के लिए देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की मुहिम चलाई जा रही हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ यह आज बेहद ही चर्चा का विषय बन चुका है। इसलिए स्कूलों और कॉलेजों में भी कई बार beti bachao beti padhao essay in hindi बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध, भाषण लिखने के लिए कहा जाता हैं। इसलिए आज कि इस पोस्ट में हमने सभी छात्रों के beti bachao beti padhao essay in hindi लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध हिंदी में लिखा है। यह लेख beti bachao beti padhao in hindi आपको काफी पसंद आएगा ।

Beti bachao beti padhao essay in hindi 2021 : बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध, भाषण १० लाइनों में, १०० शब्दों में, ३०० शब्दों में और ५०० शब्दों में

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर १० लाइनों में निबंध | 10 lines on beti bachao beti padhao in hindi

  1. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान यह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया गया था।
  2. इसकी शुरुआत 22 जनवरी 2015 में हरियाणा राज्य से शुरू की गई थी।
  3. इस अभियान के तहत देश में होने वाली बेटियों की भ्रूण हत्या पर पाबंदी लगाई गई हैं।
  4. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अनुसार चिकित्सक लिंग परीक्षण एक गुनाह है। लिंग परीक्षण करते हुए पकड़े जाने पर कड़ी से कड़ी शिक्षा दी जाने का और डाक्टर का लाइसेंस रद्द करने का भी इसमें नमुद किया गया हैं।
  5. इस अभियान का मुख्य लक्ष्य देश की बेटियों को बचाना और देश का पुरुष – महिला अनुपात बढ़ाना हैं।
  6. इस अभियान के तहत देश की बेटियों को अच्छी उच्चतम शिक्षा देने के लिए भी प्रयास किया जाता हैं। उनको शिक्षा की क्षेत्र में अच्छी सुविधाएं और अवसर उपलब्ध करा दिए जाते हैं।
  7. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ यह एक भारत देश के तीन मंत्रालयों द्वारा चलाया जाने वाला अभियान हैं।
  8. यह मोहिम देश में बच्चों के लीग अनुपात को बढ़ाना और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रयास करती हैं।
  9. इस अभियान के तहत नवजात शिशु को जन्म से पहले मारने वाले मां बाप और डाक्टर पर कारवाई की जाती हैं। उन्हे कड़ी से कड़ी शिक्षा भी दी जाती हैं।
  10. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान देश में लिंग समानता को बढ़ावा देने में और इसके बारे में लोगों में जागरूकता निर्माण करने में सफल साबित हुआ है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर 200 शब्दों में निबंध | beti bachao beti padhao essay in hindi in 200 words

हमारा भारत देश आज एक विकासशील देश है मगर फिर भी देश में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की स्तिथि निम्न है। वह पुरुषों जैसे अपनी मर्जी से जिंदगी नहीं जी सकती। उनकी स्वतंत्रता पर पिछड़े समाज ने कई सारी पाबंदियां लगाई दी गई है। जिसके कारण महिलाओं का विकास नहीं हो पा रहा हैं, उन्हे उच्चतम शिक्षा भी प्राप्त नहीं हैं।

हालांकि पुरुष और महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त है। फिर भी महिलाओं, बेटियों के साथ समाज में इस प्रकार के अत्याचार किए जाते हैं। कोई भी बेटी पाना नहीं चाहता, बल्कि सबको तो अपनी वंश का दिया चाहिए ? समाज में बेटियों को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता हैं । मुझे कहते हुए शर्म आ रही हैं कि समाज में ऐसे भी कुछ लोग है जो कुछ समय पहले विश्व में आए हुए नवजात शिशु को भी कूड़े के डिब्बे में, नालियों में फेंक देते हैं।

इसके कारण समाज में पुरुष – महिला अनुपात बेहद कम हो गया हैं, जिसे संतुलित रखना बेहद जरूरी हैं। इसलिए देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को २२ जनवरी २०१५ को शुरू किया गया।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मुहिम का उद्देश्य:

बेटी पर समाज में हो रहे आत्याचरों पर रोक लगाना, भ्रूण हत्या को रोकना और बेटी को शिक्षा जैसी सभी सुविधाओं से अवगत कराना यह इस बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मुहिम का सबसे बड़ा उद्धीष्ट है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर 500 शब्दों में निबंध | beti bachao beti padhao essay in hindi in 500 words

बेटी यानी नारी को एक विशेष शक्ति के रूप में जाना जाता है। हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथो में भी नारी को बेहद ज्यादा महत्व दिया गया हैं। ऐसा कहा जाता है कि जिस घर में नारी को पूजा जाता है, उसका सम्मान किया जाता हैं उस घर में स्वयंम लक्ष्मी को वास होता हैं।

नारी ही परिवार सबसे मुख्य स्तंभ है जो कि परिवार का संतुलन बनाए रखता हैं। नारी, महिला, बेटी ही एक है है समुल समाज में परिवर्तन ला सकती हैं। पर उसके लिए सबसे पहले नारी को विशेष रूप से शिक्षा प्राप्त होना जरूरी हैं।

आज हमारे समाज की स्तिथि कुछ अलग है, आज हमारा देश आधुनिक होकर भी कई सारे ऐसे क्षेत्र है जहां पर महिलाओं पर अत्याचार होते है, उन्हे चैन से जिन्हें के अधिकार नहीं दिए जाते। उन्हे शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति नहीं दी जाती, उनकी प्रगति पर रोक लगाई जाती हैं, उनकी मर्जी के खिलाफ उनकी कम उम्र में ही शादी कराई दी जाती हैं। इस कारण आज हमारे देश मे महिलाओं की स्तिथि बेहद खराब है। इस स्तिथि को बदलना बेहद जरूरी है।

यदि हमे अपने देश का विकास करना हैं तो पहले देश की महिलाएं शिक्षित होना बेहद जरूरी हैं। यदि महिलाएं शिक्षित हो गई तो वह अपने बच्चों, परिवार को पढ़ाएंगी और इस कदर एक परिवार के साथ पूरे देश का विकास हो जाएगा। इसके लिए आज महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी मुहिम समाज में काफी जोर दे रही हैं।

लोगों को बेटी नहीं चाहिए, उन्हे तो अपने घर के लिए वंशज चाहिए। इस कारण लोग कई सारे गुनाह को अंजाम दे रहे। चिकित्सक रूप से लिंग परीक्षण कर रहे हैं, लड़कियों की भ्रूण हत्या कर रहे हैं, नारी शक्ति को विश्व में आने से पहले ही नष्ट कर रहे हैं?

बेहद शर्म की बात हैं कि आज लिंग परीक्षण करना गुनाह होने के बावजूद भी देश के कई सारे अस्पतालों में पैसों कि लालच में आकर गुप्त तरीके से लिंग परीक्षण और बेटियों की भ्रूण हत्या जैसी गुनाओं को अंजाम दिया जाता है।  इसके कारण देश में महिलाओं और पुरुषों की जनसंख्या में काफी अंतर आया है। यही एक कारण है कि देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान शुरू करना पड़ा !

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान क्या है?

देश में बेटियों की हो रही हत्या पर रोक लगाने के लिए और देश की बेटियों को शिक्षित कराने के लिए देश के पंतप्रधान श्री नरेन्द्र मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को शुरू किया गया था। यह अभियान 22 जनवरी 2015 में हरियाणा राज्य में इसका प्रारंभ किया गया और तभी से पूरे देश में इसे लागू किया गया।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना (short essay on beti bachao beti padhao in hindi) को हरियाना राज्य से शुरू करने का यहीं कारण था कि वहां पर पुरुष – महिला अनुपात सबसे कम था। इस योजना के तहत देश की बेटियों को उच्च से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार दिए गए हैं और इसी के साथ उन्हे शिक्षा क्षेत्र में कई सुविधाएं और अवसर भी उपलब्ध करा दिए गए है। इसके कारण देश की बेटियां उच्चतम शिक्षा प्राप्त कर सके, खुद पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ बेझिझक आवाज उठा सकें और खुदकी प्रगति करके अपने देश की प्रगति में अपने योगदान दें सकें।

बेटियों की भ्रूण हत्या रोकना, चिकित्सक लिंग परीक्षण पर पाबंदी लगाना, समाज में लिंग समानता को बढ़ावा देना यह भी इस बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान एक मुख्य उद्दिष्ट हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर 700 शब्दों में निबंध | beti bachao beti padhao essay in hindi in 700 words

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ यह विषय आज समाज में सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इसे चर्चा में आने के कारण भी कई सारे है। यह एक मुहिम है जिसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ इस मुहिम के कई सारे उद्देश्य और आवश्यकताएं है।

बेटी एक हमेशा से ही सम्मानित पात्र होना चाहिए था। क्योंकि सृजनता की शक्ति भगवान के बाद सिर्फ उसी को ही मिली है। वहीं एक शक्ति है जो अपने बच्चों को जन्म देकर उन्हें पाल पोस्कर बड़ा करती हैं। विश्व में सिर्फ उसे ही जन्मदाता का वरदान मिला है। इसलिए कई बार नारी का वर्णन जन्मदायिनी के रूप में भी किया जाता है।

पर कभी वह अपने बच्चों में लड़का और लड़की के रूप में भेदभाव नहीं करती, क्योंकि खुद वह एक लड़की ही है। नारी एक खुद में ही बहुत बड़ी शक्ति हैं, उस नारी शक्ति को समजना बहुत जरूरी हैं। यदि नारी शक्ति को एकत्रित करके देश के विकास में जोड़ दिया जाए तो देश में हर एक वह बदलाव लाया जा सकता हैं जो होना जरूरी हैं ।

पर नारी को समाज में उसे उचित स्थान नहीं दिया जाता जो कि वह उसकी हकदार हैं। हमेशा से ही समाज में नारी को दूजा स्थान मिला है। उन्हे अपनी जिंदगी खुल कर जिन्हें के भी अधिकार भी प्राप्त नहीं है। इस कारण नारी का समाज में हमेशा से ही शोषण किया गया है।

मुझे यह समझ नहीं आता कि लोगों की नारी से क्या दुश्मनी है जो उसके साथ इस तरह का बर्ताव करते हैं। लोगों के विचार भी बहुत निराले हैं, उन्हे बहू तो चाहिए पर बेटी नहीं, उन्हे मां तो चाहिए पर बेटी नहीं, उन्हे बहन तो चाहिए पर बेटी नहीं… इसलिए आज भी लोग बेटी के जन्म पर खुशियों कि बजाए दुःख व्यतीत करते हैं। शायद वह बेटी को जन्म देना पाप मानते हो?

पर एक बेटी ही है जो पूरे परिवार में रोशनी लाती हैं। लोगों को लड़का चाहिए, उन्हे अपने घर को वंशज चाहिए, पर वह अपनी बेटी को घर के वंशज के रूप में कभी भी कबूल नहीं करेंगे। क्योंकि उन्हे पता है कि बेटी तो सिर्फ चार दिन कि मेहमान है, बेटा तो हमेशा से ही हमारे पास रहने वाला है।

पर आज बेहद शर्म की बात है कि जिन बेटों को मां बाप में बड़े खुशी से पाला था, उसकी हर मुराद पूरी की थी वहीं बेटा आज अपने मां बाप को नहीं पाल रहा हैं। उन्हे घर से निकालकर आश्रमों में डाल रहा हैं। आज भी कई सारे बूढ़े मां बाप का बेटी ही सहारा है। लेकिन लोग क्यों इस परिस्थिति को भूलते हैं? फिर भी लोग क्यों लड़की की वजह लड़को को ही ऊंचा स्थान देते हैं ?

लोग बेटी को हमेशा इंकार करते हैं। बेटी की भ्रूण हत्या, उसे मां की गोद में ही मार डालना, चिकित्सक भ्रूण लिंग परीक्षण जैसे घिनौने कृत्य अपनी बेटियों के साथ करते हैं। न जाने लोगों ने कितनी बेटियों का जीवन समाप्त किया है। यह कितनी शर्मनाक बात है कि लोग बेटियों को इस विश्व में आने से पहले ही उन्हे नष्ट कर देते हैं। यही वह कारण है कि देश में आज ” बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” जैसी मुहीमों चलाना बेहद जरूरी हो गया हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मुहिम की आवश्यकताएं:

समाज में लोगो द्वारा बेटियों को जन्म से पहले ही मार दिया जा रहा हैं, जिसे की हम भ्रूण हत्या की रूप में जानते हैं। यही एक कारण है कि जिसकी वजह से आज हमारे देश मे लड़कियों की आबादी घटती जा रही हैं। आज पुरुषों की तुलना में काफी कम महिलाएं मौजूद हैं। २०११ की जनगणना की अनुसार १००० पुरुषों के पीछे केवल ९३२ ही महिलाएं मौजूद हैं। यह बेहद ही चिंता का विषय हैं।

यदि ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन महिलाएं समाज से नष्ट हो जाएगी। आपने कभी महिला के बिना राष्ट्र की स्तिथि के बारे में विचार किया है? यदि ऐसा खयाल भी मन में आया तो पूरा चित्र आपके सामने प्रकट हो जाएगा ! 

एक तो समाज में पहिले से है कम महिलाएं मौजूद हैं और जितनी भी है उन्हे भी शिक्षा प्राप्त करने जैसे मूलभूत अधिकार प्राप्त नहीं हैं। इसलिए समाज में महिलाओं की स्तिथि सुधारने के लिए, उन्हे सभी मूलभूत सुविधाओं से सुसज्जित कराने के लिए, भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कार्यों के खिलाफ उन्हे सुरूक्षा प्राप्त करवाने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी मुहिमो को देश में चलाने की आवश्यकता आ पड़ी हैं।

टिप : दोस्तों ! आज के इस पोस्ट में हमने आपके लिए beti bachao beti padhao essay in hindi बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध लिखा है। यह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर हिंदी निबंध आपको काफी पसंद आएगा ।

यह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध beti bachao beti padhao essay in hindi आप कक्षा १,२,३,४,५,६,७,८,९,१० के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें हमने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान क्या है, कब शुरू हुआ, किसने शुरू किया, इस अभियान की आवश्यकताएं और उद्देश्य के बारे में बताया हैं।

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